- ‘सिर फोड़ा, जेल नहीं गया’ की शेखी से सलाखों के पीछे पहुंचा भारद्वाज
- जिस चिराग को बताया ‘बड़ा भाई’, उसी ने कर दी शिकायत
- भारद्वाज के दावों ने खड़ा किया देश में सियासी तूफान
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शनकारी छात्रा के पिता के साथ हुई मारपीट, फिर पॉडकास्ट में कथित तौर पर उसका बखान और भाजपा व एनडीए नेताओं से अपनी नजदीकी के दावे… सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हिरासत में ले लिया। इससे कुछ घंटे पहले ही उसकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन हुआ था।
मामले में सबसे बड़ा सियासी मोड़ केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बयान से आया है। जिस चिराग पासवान को भारद्वाज अपने राजनीतिक समर्थन के दावे के दौरान ‘बड़ा भाई’ बता रहा था, उन्होंने उससे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके नाम और तस्वीर का गलत इस्तेमाल किया गया है। चिराग ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराने की जानकारी देते हुए उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में लोगों से मिलना और फोटो खिंचवाना सामान्य बात है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
आखिर कौन है स्वतंत्र भारद्वाज?
स्वतंत्र भारद्वाज सोशल मीडिया पर खुद को ‘स्वतंत्र सनातनी योद्धा’ के रूप में पेश करता रहा है। सोशल मीडिया पर उसके करीब 1.84 लाख फॉलोअर्स बताए गए हैं। हिंदुत्व और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को लेकर उसके आक्रामक वीडियो पहले भी चर्चा में रहे हैं। लेकिन उसका नाम बड़े विवाद में तब आया, जब जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट हुई।
जंतर-मंतर की झड़प से शुरू हुआ विवाद
दिल्ली पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर पर हुई झड़प में संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। उनकी शिकायत पर संसद मार्ग थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस दिए गए थे। पुलिस का कहना है कि जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है और मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। लेकिन कई सप्ताह बाद सामने आए एक पॉडकास्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया।
पॉडकास्ट में ‘सिर फोड़ने’ की कथित शेखी
वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर संजय कुमार पर हमला करने का बखान करता दिखाई दिया। उसने चोट को गंभीर बताते हुए हत्या के प्रयास की धारा तक का जिक्र किया और दावा किया कि इसके बावजूद वह जेल नहीं गया। यहीं से सवाल उठने लगा कि आखिर भारद्वाज को किसका संरक्षण हासिल है?
‘कपिल मिश्रा का फोन आया’ वाला दावा
पॉडकास्ट में भारद्वाज ने कथित तौर पर दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा के नाम का जिक्र किया और ऐसा दावा किया कि उनके फोन के कारण वह जेल जाने से बच गया। उसने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी अपने कथित राजनीतिक समर्थन के संदर्भ में लिया। हालांकि, किसी नेता की ओर से वास्तव में पुलिस को फोन कर भारद्वाज को बचाने का स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। दिल्ली पुलिस ने भी राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
चिराग पासवान ने कहा-मेरे नाम का गलत इस्तेमाल
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान स्वयं सामने आए और भारद्वाज के दावे से दूरी बना ली। चिराग पासवान ने कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज ने उनके नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने इस संबंध में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की।
चिराग ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामले में कार्रवाई नहीं होती है तो इससे गलत उदाहरण जाएगा। उन्होंने निशु और उनके परिवार को न्याय मिलने की बात भी कही। इस बयान के बाद भारद्वाज के उस दावे पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जिसमें वह चिराग पासवान के समर्थन का संकेत दे रहा था।
दिल्ली पुलिस बोली-कोई राजनीतिक दबाव नहीं
भारद्वाज के पॉडकास्ट के बाद दिल्ली पुलिस को भी पूरे मामले पर सफाई देनी पड़ी। पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को निराधार बताया। पुलिस का कहना है कि संजय कुमार को झड़प के दौरान भारद्वाज के हाथ में पहने कड़े से चोट लगी थी। मेडिकल रिपोर्ट में चोट सामान्य प्रकृति की बताई गई और पुलिस के अनुसार सिर की हड्डी टूटने की बात मेडिकल रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं हुई।
पुलिस ने कहा कि घटना के बाद भारद्वाज और एक अन्य आरोपी को हिरासत में लिया गया था, पूछताछ हुई और कानून के मुताबिक नोटिस दिया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
फिर भारद्वाज ने कहा-आत्मरक्षा में हुआ सबकुछ
पॉडकास्ट वायरल होने और विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज का दूसरा पक्ष भी सामने आया। उसने दावा किया कि जंतर-मंतर की घटना हमला नहीं बल्कि आत्मरक्षा थी। भारद्वाज का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान वह कई लोगों से घिर गया था और उसने खुद को बचाने के लिए प्रतिक्रिया दी। उसने अपने पास घटना का वीडियो होने का भी दावा किया। इस तरह एक तरफ पॉडकास्ट में कथित तौर पर हमले का बखान और दूसरी तरफ बाद में आत्मरक्षा का दावाकृदोनों बयानों के बीच अंतर भी पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
शुक्रवार को सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी
मामले ने शुक्रवार को उस समय और तूल पकड़ लिया जब सीजेपी कार्यकर्ता संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे और स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शनकारियों के साथ नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुकदमे में और कड़ी धाराएं लगाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का दावा था कि एक व्यक्ति सार्वजनिक रूप से मारपीट का बखान कर रहा है और राजनीतिक संरक्षण मिलने की बात कह रहा है, इसके बावजूद उसके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तारी का भरोसा दिया था। इसके कुछ ही घंटे बाद भारद्वाज के बुलंदशहर में पुलिस की गिरफ्त में आने की खबर सामने आ गई।
बुलंदशहर पहुंची पुलिस, भारद्वाज हिरासत में
दिल्ली पुलिस की टीम स्वतंत्र भारद्वाज की तलाश में उत्तर प्रदेश पहुंची। ताजा रिपोर्टों के अनुसार उसे शुक्रवार को बुलंदशहर में हिरासत में ले लिया गया। इससे पहले उसके पुलिस टीम से बच निकलने की खबर भी आई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे पकड़ लिया। इस कार्रवाई के साथ ही मामला अब सोशल मीडिया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर कानूनी कार्रवाई के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है।
एससी/एसटी एक्ट भी जुड़ा, गंभीर धाराओं की मांग
प्रदर्शन के दौरान पीड़ित पक्ष ने एससी/एसटी एक्ट के साथ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा लगाने की भी मांग की। रिपोर्टों के अनुसार मामले में एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं जोड़ी गई हैं। हत्या के प्रयास की धारा लगाने के सवाल पर मेडिकल राय और आगे की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सियासी संरक्षण के दावे पर अब सवाल ही सवाल
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल स्वतंत्र भारद्वाज के कथित राजनीतिक संबंधों को लेकर है। उसने खुद कपिल मिश्रा और चिराग पासवान जैसे नेताओं के नाम लेकर राजनीतिक समर्थन होने का दावा किया। कपिल मिश्रा के फोन के बाद जेल नहीं जाने जैसी बात भी वायरल पॉडकास्ट में सामने आई। लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसकी कार्रवाई पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं था।
दूसरी तरफ चिराग पासवान ने भी अब सार्वजनिक रूप से भारद्वाज के दावे से दूरी बनाते हुए अपने नाम और तस्वीर के गलत इस्तेमाल की शिकायत दर्ज कराई है और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ऐसे में अब सवाल यह है कि भारद्वाज जिन राजनीतिक रिश्तों का सार्वजनिक तौर पर दावा कर रहा था, उनमें कितनी सच्चाई थी? क्या वे महज सोशल मीडिया पर प्रभाव दिखाने के लिए किए गए दावे थे या उनके पीछे कोई वास्तविक संपर्क था? इसका ठोस जवाब जांच और स्वतंत्र साक्ष्यों से ही मिल सकता है।
पहले ‘पावर’ का दावा, अब पुलिस की गिरफ्त में
इस पूरे प्रकरण में कुछ ही दिनों में तस्वीर तेजी से बदली है। पहले वायरल पॉडकास्ट में कथित मारपीट का बखान, फिर राजनीतिक पहुंच का दावा, उसके बाद दिल्ली पुलिस की सफाई, चिराग पासवान की शिकायत और अंततः पुलिस की कार्रवाई।
अब स्वतंत्र भारद्वाज पुलिस की गिरफ्त में है और जांच का दायरा भी बढ़ गया है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि पुलिस जांच में मारपीट की घटना, वायरल बयानों और कथित राजनीतिक संरक्षण के दावों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।




